Tuesday, August 22, 2017

हंसीन बला

***हंसीन बला**

"यह रेशमी जुल्फे यह शरबती आँखे इन्हे देखकर जी रहे है सभी.." जोर से बारिश हो रही थी एफ. म पर यह पुराना गीत बज रहा था. गरम चाय की चुस्कियां लेता हुआ मै रेस्टोरंट की कोने की मेज पर बैठा ..अपने सामने बैठी लडकी को देख रहा था ...उम् होगी  बाइस तेहीस साल बेहन्तहां खुबसु
रत वहाँ बहुत से युवा उसे नजरे चुराते देख रहे थे कुछ मौसम था कुछ संगीत ही ऐसा बज रहा था
वो लडकी इन सभी बातों से अन्जान अपने में ही खोई हुई थी .
मेरी चाय लगभग खत्म होने को थी पर बारिश बदस्तुर जारी थी बैठे बैठे कुछ बोरियत सी हो रही थी सोचा अब घर के लिए निकलना ही होगा वरना रीमा के ताने शुरू हो जायेगे इतनी देर कहाँ लगा दी अॉफिस से तो कब के निकल चुके बिल पेय कर मै निकल ही रह था कि पीछे से आवाज आयी हेलो..मैने पीछे घुम कर देखा तो वही मोहतरमा थी ..एक अजीब सी कशिश थी उसकी आवाज में ,जी कहिए मैने जवाब दिया क्या आप मुझे छोड देगे यह बारिश तो अभी नही रूकने वाली..ठीक है मेरा  लहजा सापाट था.आइये मैने गाडी निकाली...और वो हवा बाते कर रही थी मै अपनी खुशी को दबा रहा था मन में सोच रहा था लगता है ऊपर वाला बडा मेहरबानं है मुझ पर ..आपको कहाँ जाना है कर्जिन रोड तक छोड दीजिये बस , आगे मै खुद चली जाऊंगी आपको थोडी तकलीफ होगी ,अरे नही ऐसी कोई बात नही
....उसके चेहरे पर उलझन सी थी..लीजिये मैम आ गयी आपकी सडक.. वह मानो नींद से जागी हो ओह ! शुक्रिया...
कहते हुए झटपट उतर चल पडी पीछे मुड कर भी न देखा बारिश लगभग रूक सी गयी कौन थी वो हसीनं बला मै सिर्फ सोचता ही रहा उसके ख्यालों में डूबा कब घर के कारिडोर तक जा पहुचाँ पता ही न चला.....
़़़़़़़़़
घर नें घुसते ही रीमा शुरू हो गयी कहाँ लगा दी इतनी देर ...बच्चे भी सो गये बारिश का बहाना मत बनाना तुम कोई स्कूटर से तो नही आते जाते ...गाडी है न ,
ओफ हो .!! रीमा, तुम तो नाहक ही शुरू हो जाती हो..एक जगह रूक गया था भुख लगी थी..चा़य पीने के लिए रूक
गया था ठीक है... मै खाना लगा देती हूं नही मुझे भुख नही पेट तो इसके तानों से ही भर गया  मै मन ही मन बोला मैने अगर सुन लेती तो फिर शुरू हो जाती.
 अगले दिन जैसे ही मै तैयार हो आफिस के लिए घर से निकल रहा था कि रीमा घबराई हुई कमरे में आयी और बोली बाहर पुलिस आई है .पुलिस पर क्यो ?? मुझे क्या पता ..?
 क्या बात है सर आज हमारे घर कैसे आना हुआ मि. कबीर हमें आपके घर की तलाशी लेनी है  हमें जानकारी  मिली  है
 आप ड्ग्स सप्लाई करते है यह आप क्या कर रहे है ..मै एक कम्पनी में काम करता हूँ आप चाहे तो मेरे आफिस बात कर सकते है , हमारी जानकारी पक्की है ...तलाशी सो घर की ...उन्होने पूरा घर छान मारा कही कुछ न था..मैने कहा था न सर आपकों गलतफहमी हुई है तुम चुप करो, मि.सावलकर बाहर चैक करो.. ओके सर.
 ......बाहर तो बस गाडी है सर  गाडी में देखों यह लो चाबी आप अपनी तसल्ली करे .. सर मिल गये  देखो, कांस्टेबल के हाथ में छोटे छोटे पाँच छ: पै0. थे उनमें सफेद पदार्थ था
 मै लगभग बेहोश होने को था ..मुझे नही  पता सर यह कहाँ से आया....मुझे सारा माजरा समझ आ गया..उस लडकी ने ही यह  गाडी रखा होगा जिसने कल लिफ्ट मांगी थी मै पूरी तरह फंस चुका था रीमा मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी....!!!!
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आखिर क्यों ??

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