Monday, December 25, 2017

नया साल

नया साल

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 कोठी के लॉन में टैन्ट लगानें व डेकोरेशन का काम चल रहा था...
"वहां पर क्या हो रहा है माँ ... बसन्ती की बेटी ने बर्तन मांज रही अपनी माँ से पूछा नये साल के समारोह की तैयारियां हो रही है रात को पार्टी होयेगी,  साहब लोगो के यहां बहुत बडे बडे लोग आयेगे |
"हम भी जायेगे "
"नही बिटियां हमारे नसीब में यह सब कहां हम तो सबके जूठे बर्तन समटने जायेगे , कुछ बख्शीस भी देते है साहब हमें ,"
"उससे मै तुझे नयी फ्राक लाकर दूंगी |"
"उनका नया साल आयेगा और हमारा माई हमारा नई आयेगा !" नन्ही बच्ची ने आश्चर्य से पूछा
"हमारे लिए क्या नया क्या पुराना सब दिन एक जैसे ही तो है !"
"हमारा भी नया साल आयेगा माई मै तुम्हारे लिए नया साल लाऊंगी".....
 हां हां हां ,  बसन्ती उसकी बाते सुन हंसने लगी , " दुकान  पर थोडे ही मिलता है ,  जिन लोगो के पास बहुत पैसा , बहुत बडा घर नौकर चाकर होता है उनका नया साल आता  हमारे जैसे गराबों की किस्मत में यह  सब नही होता है |"
"अब जा मुझे काम करने दे जाकर खेल ले मेरी खोपडिया में दर्द काहे करत है | बित्ते भर की छोकरियां रार करती है |
अगर वक्त पर काम खत्म मही हुआ तो अभी मालकिन बातें सुनायेगी |"
माँ.... नन्ही बच्ची बसन्ती के कन्धे पर झुल गयी  , " जब मै बडी हो जाऊगी खुब पढुंगी बहुत बडी साहब बनूंगी  ! " देखना माई मै फिर इससे भी बडा नया साल लाऊंगी तुम्हारे लिए |"
बसन्ती उसकी बातों से हैरान बस उसे देखती रह गयी आँखो से टप टप आंसु गिरने लगे मन में सोचने लगी काश यह सब हो जाये |
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चित्र गुगल से साभार 

आखिर क्यों ??

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