Friday, January 26, 2018

कमाई-3

"हरामजादी , कुत्तिया कहां से  लायी थी  पैसा " , बता शराब के नशे में थुत्त रविन्द्र अपनी पत्नी को गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था |
"जब खा पी कर उडा दिए एेश में , तब नही पूछा कहां से आये तेरे पास नोट !! "अपमान और डर से रवीना गिडगिडाते हुए बोली |
" जा साली तू ही लेनदारों से निबट मै जा रहा हूं ", कहते वो पीछे के दरवाजे से निकल गया | ड्रांइगरूम में बैठे लेनदार सबकुछ सुन चुके थे |
रवीना ड्रांइगरूम में आकर बोली मै आपकी सारी रकम चुका दुंगी कुछ वक्त दे दो , हम कुछ नही जानते तुम्हे एक सप्ताह की मोहलत दे रहे है हमारी रकम ब्याज समेत चुका देना  धडधडाते हुए वह सब निकल गये |
रवीना बेबसी रोने लगी और कर भी क्या सकती थी उस घडी को कोसने लगी जब उसने ब्याज पर रकम ली अपनी पडोसन के कहने पर शराबी पति चारों तरफ करजे  में डूबा था अब वो भी उसी में फंस गयी सोचा था इन पैसों गाडी की किस्त चुका देगे फिर जो आमदनी होगी उससे ब्याज देते रहेगे |
हाय री किस्मत इस शराबी ने उसे कही की न छोडा गाडी की किस्त भरने के बजाय उस रकम से उसे बिना बताये दूसरी गाडी ले आया ज्यादी कमाई के लालच में कर्ज के दलदल में दोनो घिर गये |
रोते रोते पूरा सप्ताह बीत गया रवीना का सुंदर चेहरा मुरझा गया जहां भी मदद मांगने गयी दुत्कार ही मिली | कही से भी पैसों का इन्तजाम न हो सका खाने तक के लाले पड गये |
पडोसन ने रवीना  के बुरे हालात देख के कहा
वह उसे कुछ लोगो से मिलवा देगी जो उसे काम करवाने के बदले अच्छी खासी रकम दे देगे मजबूर रवीना क्या करती चल पडी उसके साथ वह उसे ऐसी जगह ले गयी जो उसने पहले कभी न देखी थी अजीब किस्म के लोग सब उसे घुर रहे थे |
एक आदमी जिसने अपना चेहरा छिपाया हुआ था उससे बोला यह कुछ पै0 है जो तुम्हे इस पते पर पहुचानें है अगर तुमने इसे बिना किसी रूकावट के सही जगह पहुंचा दिया तो यह नोट तुम्हारी कमाई होगें रवीना ने देखा दो दो हजार के नये नये रूपये थे उसने सोचा अगर वह पैकेट पहुंचा दे तो उसके कर्जदारों का मुंह बंद हो जायेगा लेकिन इसमें है क्या ? उन लोगो का रूख देख उसकी पूछने हिम्मत नही हुई |
‎रवीना को न जाने क्यों कुछ अच्छा न लगा उसने कहा वह सोच के बतायेगी यह काम करे कि नही |  ठीक है कल बता देना वरना हम किसी और से करवा लेंगे |
‎रात भर रवीना सो न सकी |
‎सुबह चीख पुकार मची थी पडोसन चिल्ला रही थी , लेनदार भी खडे थे कि उनका पैसा मिलेगा दरवाजा जो खुला ही था अन्दर पंखे पर रवीना की लाश टंगी थी |
‎लेनदारों के मुंह लटक गये उसके आदमी का अता पता नही था तीनों आपस में लडने लगे किसी के भी कहने से रूपया ब्याज पर देने जरूरत नही कमाई हो या न हो |

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सुनीता शर्मा खत्री
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Tuesday, January 23, 2018

कमाई-2

"मुठ्ठी में रखे नोट उसने रसोईघर में आटा गुंधती पत्नी के ऊपर फेक दिए ,  " ले पकड आज दिन भर बस इतनी ही कमाई हुई | "
" यह क्या मेरे ऊपर क्यों फेक रहे हो जितनी भी हुई संभाल लो , " ऐसे लक्ष्मी  का अनादर नही करते भगवान ने चाहा तो अच्छे दिन भी आयेगे..."
" हमारे कभी अच्छे दिन नही आयेगे सुना तूने |"
पति ने झल्लाते हुए अपनी भडास निकाली ,
"कुछ और काम करना होगा इस दुकान की कमाई से घर का खर्च भी नही ढंग से चलता |"
फटाफट रसोई का काम खत्म कर पति के पास आकर बैठी   
नन्दिनी प्यार से बोली इस तरह गुस्सा करने से क्या फायदा  फेंके नोट नन्दिनी ने संभाले और वापस उसके हाथ में थमा दिए , मै तुम्हारा हाथ बटाऊं काम में ? घर का काम खत्म कर मै भी दुकान पर आ जाऊंगी |
तुम्हारी मदद हो जायेगी |"
"तुम्हे दुकान पर आने की जरूरत नही तुम घर के काम ही करों " !
रमेश को बहुत गुस्सा आ रहा था दिन दुकान में बैठे बैठे उसकी कमर अकडा गयी थी , उस पर दो चार ग्राहक ही आने से   आमदनी लगातार कम हो रही थी , उसकी समझ में ही नही आ रहा था क्या करे |
अगले दिन नन्दिनी खाना देने के बहाने रमेश की दुकान पर जा पंहुची वहां वो नदारद था | कस्टमर देख रहे थे  खडे हुए दुकान तो खुली थी पर मालिक गायब !!
नन्दिनी ने सभी को समान दिया तब तक रमेश भी आ गया ,
" तुम कहां थे कस्टमर खडे थे मुझे जरूरी कार्य से जाना पडा  यही बाजार में , अच्छा हुआ तुम आ गयी "
" देखो कितना समान बिक गया यह देखो कमाई |"
रमेश अवाक था नन्दिनी ने दुकान पर पैर रखते ही  सारा काम कर दिया जब मै दूसरे काम में था |
रमेश मुस्कुरा कर बोला अच्छा जी तो फिर ठीक है लक्ष्मी
जी ,  कल से तुम भी घर के काम  जल्दी खत्म कर मेरे साथ ही आ जाना  |
"दोनो मिलकर काम करेगे तो कमाई भी बढेगी |"
नन्दिनी हंसने लगी बोली , " देर से ही सही मेरी बात तो मानी "|
दोनो की खिलखिलाहट वातावरण में महक उठी |
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सुनीता शर्मा खत्री
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Saturday, January 20, 2018

कमाई - 1

जैसे जैसे संगीत तेजी से बजता जा रहा था उसके पांवो की थिरकन भी तेजी बढती जा रही थी मानो पांवों में बिजलियां कौंध रही हो !
दिमाग में कुछ नही था बस था तो पैसों की जरूरत का ख्याल ! बस आज थोडी कमाई और हो जाये ताकि मिनी के लिए दूध का डब्बा और दवा का इन्तजाम हो सके , सुबह उसका कुम्लाया चेहरा देख दिल भर आया |
बार में हर शख्स उसको ही देखने लगा नशा शराब में था या उसके नृत्य में ,
वाह !! क्या नाचती है सारी लडकियों पर से नजर हटा सारे पियक्कड  उसी पर नजर गडा बैठे |
जब संगीत खत्म हुआ थिरकन थम बेहोशी के आलम में जा पंहुची , आँखे खुली सारी लडकिया उसके इर्द गिर्द बैठी थी , " क्या हुआ रवीना , आज तो तुम होश में नही थी "??
" जिसकी बेटी बीमार हो वह होश में कैसे हो सकता है"?  रवीना नाच से मिले रूपयें इकट्ठा किये जो लडकियों उसे दिये , तुम्हारी बेटी बीमार है तुम हमारे भी ले लो और उसका इलाज कराओं सभी एकसुर में बोलने लगी ...
"नही नही... इतने काफी मुझे पता तुम लोगो की हालत भी | तुम सबने मेेरा ध्यान रखा उन पियक्कडों से बचा के रखा यह क्या कम है |"
अब मै चलती मुझे मिनी को डा0 के पास ले जाना है |
जैसे बाहर निकली बार मालिक सामने ही खडा था  , " कहां चली सारी कमाई  लेकर इधर भी तो दे ," 
" कल भी ऐसे ही नाचना "
" कल नही आ पाऊगी , मेरी बेटी बहुत बीमार है |"
 " साली तेरे बहाने सब पता है जा रही होगी यार के साथ ऐश करने "
 और उसने उसके  सारे रूपये छीन , चन्द उसके हाथ में पकडा दिये , वह गिडगिडाती रही उसे रहम न आया |

बेबस रवीना चल पडी मजबूर कदमों से , आँख से आंसु लगातार बह रहे थे इतने कम पैसों में कोई ढंग का डाक्टर नही देखेगा , फिर उसी दवाखाने से दवाई लानी होगे जहां के इलाज से सिर्फ थोडे दिन को आराम आता है मिनी दुबारा बीमार हो जाती है , मन  ही मन में बार मालिक को कोसती रही जिसने उसकी मेहनत की कमाई को छीन लिया |


उसने फैसला किया कि कल से सडक पर नाचेगी चाहे कुछ भी हो पर अपनी कमाई का हिस्सा किसी को भी नही देगी |

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सुनीता शर्मा खत्री

Saturday, January 6, 2018

माई

माई
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"गरमागरम दूध मिल रहा बादाम का , यहां बैठी है
जा माँ के मंदिर में , "
नही जा रही बडी अजीब है तू तेरा कौन सा खजाना है जो कोई चुरा ले जायेगा "|
 " इन पोटलियों की रखवाली कर रही है इतनी ठन्ड हो रई भीतर चली जा प्रसाद  में दूध मिल रहा है सुनती ही नही |"

"नही जाना मुझे तू जा यहां से तू भर ले अपने पेट में "

भिखारन माई को पता था जैसे ही वह मंदिर के अन्दर जायेगी वह उसकी पोटली ले भाग जायेगा |
 " नही नही लालच नही करूगी कल साथ वाली माई माई आयेगी तो ले लेगी अपना प्रसाद |"
" जा माई जा "
" ‎काहे बार बार कह रहा है , एक बार कह दिया न नही लेना मुझे |"
भीख से जमा धन राशि की पोटली को  कस कर पकड लिया माई ने मानों कह रही हो अब तक अपनी हर चीज लोगो के बहकावे में लुटा चुकी है
बस अब नही लुटाऊंगी  |

आखिर क्यों ??

****************** " क्या माँगती हो भगवान से पूजा पाठ कर ! " पूजा गृह से वापस लौटी सन्जना पर तंज कसता हुआ नवीन मुँह टेढा कर मुस...

life's stories