कमाई-3

"हरामजादी , कुत्तिया कहां से  लायी थी  पैसा " , बता शराब के नशे में थुत्त रविन्द्र अपनी पत्नी को गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था |
"जब खा पी कर उडा दिए एेश में , तब नही पूछा कहां से आये तेरे पास नोट !! "अपमान और डर से रवीना गिडगिडाते हुए बोली |
" जा साली तू ही लेनदारों से निबट मै जा रहा हूं ", कहते वो पीछे के दरवाजे से निकल गया | ड्रांइगरूम में बैठे लेनदार सबकुछ सुन चुके थे |
रवीना ड्रांइगरूम में आकर बोली मै आपकी सारी रकम चुका दुंगी कुछ वक्त दे दो , हम कुछ नही जानते तुम्हे एक सप्ताह की मोहलत दे रहे है हमारी रकम ब्याज समेत चुका देना  धडधडाते हुए वह सब निकल गये |
रवीना बेबसी रोने लगी और कर भी क्या सकती थी उस घडी को कोसने लगी जब उसने ब्याज पर रकम ली अपनी पडोसन के कहने पर शराबी पति चारों तरफ करजे  में डूबा था अब वो भी उसी में फंस गयी सोचा था इन पैसों गाडी की किस्त चुका देगे फिर जो आमदनी होगी उससे ब्याज देते रहेगे |
हाय री किस्मत इस शराबी ने उसे कही की न छोडा गाडी की किस्त भरने के बजाय उस रकम से उसे बिना बताये दूसरी गाडी ले आया ज्यादी कमाई के लालच में कर्ज के दलदल में दोनो घिर गये |
रोते रोते पूरा सप्ताह बीत गया रवीना का सुंदर चेहरा मुरझा गया जहां भी मदद मांगने गयी दुत्कार ही मिली | कही से भी पैसों का इन्तजाम न हो सका खाने तक के लाले पड गये |
पडोसन ने रवीना  के बुरे हालात देख के कहा
वह उसे कुछ लोगो से मिलवा देगी जो उसे काम करवाने के बदले अच्छी खासी रकम दे देगे मजबूर रवीना क्या करती चल पडी उसके साथ वह उसे ऐसी जगह ले गयी जो उसने पहले कभी न देखी थी अजीब किस्म के लोग सब उसे घुर रहे थे |
एक आदमी जिसने अपना चेहरा छिपाया हुआ था उससे बोला यह कुछ पै0 है जो तुम्हे इस पते पर पहुचानें है अगर तुमने इसे बिना किसी रूकावट के सही जगह पहुंचा दिया तो यह नोट तुम्हारी कमाई होगें रवीना ने देखा दो दो हजार के नये नये रूपये थे उसने सोचा अगर वह पैकेट पहुंचा दे तो उसके कर्जदारों का मुंह बंद हो जायेगा लेकिन इसमें है क्या ? उन लोगो का रूख देख उसकी पूछने हिम्मत नही हुई |
‎रवीना को न जाने क्यों कुछ अच्छा न लगा उसने कहा वह सोच के बतायेगी यह काम करे कि नही |  ठीक है कल बता देना वरना हम किसी और से करवा लेंगे |
‎रात भर रवीना सो न सकी |
‎सुबह चीख पुकार मची थी पडोसन चिल्ला रही थी , लेनदार भी खडे थे कि उनका पैसा मिलेगा दरवाजा जो खुला ही था अन्दर पंखे पर रवीना की लाश टंगी थी |
‎लेनदारों के मुंह लटक गये उसके आदमी का अता पता नही था तीनों आपस में लडने लगे किसी के भी कहने से रूपया ब्याज पर देने जरूरत नही कमाई हो या न हो |

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सुनीता शर्मा खत्री
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