Monday, February 19, 2018

जोगन

जोगन

*****************
वो आ गयी ....जोगन आ गयी माँ ...दरवाजे पर खडी है  |"
"ले पकड और दे आ उसको "  निम्मी ने झट से दस का नोट पकडा और दरवाजे पर दौडती हुई जा पंहुची |
जोगन उसको बडी सुंदर लगती थी उसकी जटायें उसका गाना , मन में सोचती , यह कितना मीठा गाती है  , यह
जोगन क्यों है ?
इतनी सुदंर है फिर भी !
क्या इसकों कोई न मिला ब्याहने वाला सैकडों सवाल अलहड निम्मी के मन में आते रहते किससे जवाब माँगती माँ को पूछों तो डाँट देगी   | वह छुटपन से इसे देखती आ रही है | गेरूऐ रंग के लिबास में उसका चेहरा चमचम  चमकता रहता है |
निम्मी ने उसको दस रूपये पकडा दिए वह चली गयी ..साथ ही  चला गया उसका संगीत |
निम्मी एकटक देखती रही | वह ज्यों ज्यों बडी हो रही थी जोगन को देख  सोच में पड जाती एक लगाव सा हो गया था उससे | उसने भी ठान लिया अबकी वह आयेगी तो उससे पूछेगी चाहे जो हो माँ झट से आवाज दे देती है पहले से पैसे छुपा कर रखुगी ताकि माँ से न माँगने पडे जब जोगन को दे दूंगी तो साथ उसके बारे में भी पूछुगी ??
स्कूल से आते ही निम्मी ने माँ से पीछा ,
"माँ जोगन आयी थी , आज नही आयी , "
"कहां चली गयी ? "
"  कितनों दिनों से तो नही आयी "  तूझे क्या काम आन पडा जोगन से , नही आयी  ?? तूझे क्या ?? वह तो जोगन है  | इनका कोई एक ठिकाना तो होता नही गाते है  , घुमते है और  मांगते है |"
"ऐसे ही पूछ रही थी , वह गाती तो कितना अच्छा है न माँ |"
"हाँ  बिटियां , गाती तो बहुत ही बढिया है |
कही दूर निकल गयी होगी ,  माँगते माँगते , " |
माँ कही खो सी गयी |
.....
निम्मी यहां क्यो बैठी हो ??
" जोगन का इन्तजार कर रही हूं कब आयेगी वो , "
‎माँ ने जवाब न दिया भीतर चली गयी , तभी कानों में जानी पहचानी आवाज सुनाई देने लगी निम्मी चहक उठी जोगन आ गयी झटपट अपने बैग से दस का मुडा मोट निकाल ले आयी , आज तो उससे पूछेगी जरूर |
‎जोगन दरवाजे पर आ पंहुची गीत .....जारी था ...निम्मी को बाहर देख मुस्कायी थोडी देर बाद गाना खत्म हो गया उसने अपनी झोली निम्मी के आगे फैला दी निम्मी ने पैसे नही दिए जोगन निम्मी को सवालियां नजरों से देेखने लगी क्या मेरा गीत अच्छा नही लगा दूसरा सुना दू ?
‎निम्मी ने हिम्मत दिखाते हुए पूछा ... " तुम ऐसी क्यों हो ? तुम्हे डर नही लगता ? कहां घुमती हो ? बाकि औरतों की तरह घर में क्यो नही रहती ???"

‎एकसाथ इतने सारे सवाल जोगन देखती रही निम्मी को अपलक ...झोली समेट ली उसने और बिना जवाब दिए चल दी वहाँ से |
‎" ऐ.... सुनों तो  ! यह पैसे तो ले लो |"
 जोगन ने सुना पर अनसुना कर  दिया | गाना फिर भी गा रही थी ....जिसका दर्द निम्मी ने साफ पहचान लिया |
‎"  इसने तो कुछ बताया ही, नही कोई नही बताता |"
‎कुछ देर निम्मी सोचती रही फिर सहेलियों के साथ खेलने चली गयी वहां भी उसका मन न लगा |
‎.....
"इस लडकी को कोई काम धाम नही बस जोगन के बारे में ही सोचती रहती  है "माँ बोल रही थी , पापा से |
"तो तुम उसके बारे में बता क्यो नही देती "
"क्या बताऊ "
माँ स्वर तीखा हो गया, " जो जानती हो वही "
नही  मै नही जानती मै उसे निर्लज्ज को उसका नाम भी न लो अगर अबके यहां मांगने आयी तो डपट दुंगी ताकी दोबारा इस गली से गुजरना ही छोड दे जाये कही और अपना तान तंबूरा ले कर |
तुम्हारा क्या बिगाडती है ! बेचारी भगवान का भजन करती है मांग मांग कर गुजर बसर कर रही है , तुमसे यह भी न देखा जाता कैसे पत्थर हो गयी हो तुम !!
"हाँ ! मै पत्थर हो गयी हूं भगवान भी तो पत्थर का  है फिर काहे उसके गीत गाती फिरती है |"
तुम भुल गये उसके कारनामें ! मै नही भूल सकती जी को जलाने हमारे दरवाजे पर आती है , और मेरा मुंह न खुलवाओं तो बेहतर ही होगा कम से कम तुम्हारे लिए तो |"  फिर चुप्पी छा गयी , माँ की आवाज नही सुनाई दी  |

निम्मी बाहर गयी तो देखा न वहाँ न माँ थी , न पिताजी कहाँ गये दोनो ?
......" माँ माँ . ..."

"क्यो चिल्ला रही हो यही हूं ," कमरे से माँ की आवाज सुनाई दी  , माँ तुम पिताजी से गुस्सा क्यो हो कहां गयो वो मुझे नही पता वह  चिल्लायी निम्मी ने देखा माँ की आँखों में आंसु थे तुम क्यो रो रही हो क्या हुआ पापा ने कुछ कहा क्या ??

 माँ ने निम्मी को  भींच कर सीने से लगा लिया |......
…….

निम्मी ने माँ के आँसु पोछे  " माँ अगर तुम्हे बुरा लगता है तो मै कभी भी उसके बारे में नही पछूंगी | " माँ को दुखी देख निम्मी को बहुत दुख हुआ उसने फैसला किया वह कभी उसका जिक्र न करेगी न ही उसे भीख देने जायेगी |
कई दिन बीत गये जोगन भी नही आयी गाना गाने |
निम्मी सोचती जरूर पर कहती नही थी ताकि माँ को दुख न पंहुचे और घर में कलेश न हो |
दीवाली का दिन था निम्मी बहुत उत्साह में थी ढेर सारे पटाखे लायी थी... बाजार से जलाने को पापा से जिद कर  |
शाम को बहुत से मेहमान भी आये थे मौसी घर में रूकी थी बाकी सब चले गये अगले दिन |
मौसी निम्मी दोनो ने बहुत पटाखे जलाये ..बहुत मजा आया निम्मी बहुत खुश थी उस दिन ....तभी कानों में वही जाना पहचाना सा गीत संगीत गुंजने लगा ,  " कौन है  निम्मी ?? मौसी ने पूछा ? ' अरे कोई नही एक मांगने वाली है दरवाजे पर जाओ मौसी उसको पैसे दे आओ |'
"तुम भी चलो निम्मी दोनो उसे दीवाली का प्रसाद भी दे आते है |"
" न बाबा न मै नही जाती तुम्ही जाओ"  और निम्मी झटपट अपने कमरे में घुस गयी अजीब है मौसी को आश्चर्य हुआ " लाओ दीदी मै ही दे आती हूं |"
जोगन को देख वह हैरान हो गयी,  यह इस हाल में ये तो वही है जो बरसों पहले घर छोड गयी थी ठीक उस समय जब इसकी बारात आने वाली थी |
जोगन अपने गाने में मस्त थी अपनी झोली फैला भीख तो ले ली पर उसकी आँखे निम्मी बाँट जोह रही थी कुछ बजाती , गाती रही , रूकी रही फिर चली गयी |

"दीदी दीदी यह माँगने वाली तो वही है न जो...?"

माँ ने उसे इशारे से चुप करा दिया क्योकि निम्मी वहां थी |
‎ निम्मी ने उन पर ध्यान न दिया चुपचाप वहाँ से खिसक गयी छत से  जाती हुई जोगन को दूर से ही देखती रही |

जब वापस आयी तो माँ व मौसी आपस में बात कर रहे थे |

“‎यह जोगन बन कर घुम रही दीदी आपके आस-पास जब इसकी शादी कर रहे थे तो भाग गयी थी किस मिट्टी की बनी है यह स्त्री |”

‎माँ बहुत धीरे धीरे बोल रही थी , " हाँ यही से गुजरती है पहले पहले तो मै न पहचानी थी एक दिन पास से देखा तो पहचाना यह अपनी नित्या ही है जिसने अपनी  शादी छोड घर से चली गयी बहुत ढूंडा  हमने कही नही मिली लोगो ने पता नही क्या क्या बोला किसी के साथ भाग गयी होगी और भी इतना बुरा कि मै बता नही सकती पहले ही कह देती  तो  माँ बाऊ जी  रिश्ता ही क्यो करते  लडके वालों ने जो तमाशा किया जो बेईज्जती की हमारी उसे हम भूल नही सकते माँ बाऊ जी ? "
"‎ वो दोनो भी तो इसी गम व सदमे में दुनिया से चले गये इकलौती लडकी थी किसी चीज की कोई कमी न थी पर देखों इसका नसीब प्रेम करती है भगवान से इसी धुन में हमारा एक न सोचा  भगवान  की पूजा तो गृहस्थी में भी हो सके है |"
" ‎जो भी है दीदी अब तो यह सालों पुरानी बात हो गयी तब तो निम्मी भी नही थी पर अब जब उसे यह पता चलेगा यह उसकी सगी बुआ है फिर क्या होगा दीदी ??"

" ‎हां बात तो सही  है मै उससे कब तक छिपाऊं  उसके पापा कहते है बता दो , वो हमेशा पूछती है खुन को खुन जोर मारता है |"
‎मुझे तो लगता है वो इसे ही देखने आती है मै उसकी छाया भी न पडने दुंगी अपनी बच्ची पर |"

निम्मी ने जब यह सुना कि जोगन उसकी अपनी सगी बुआ है तो वह सन्न रह गयी |

निम्मी की आँखों से आँसू बह निकले वह रोते रोते वह माँ और मौसी दोनो के नजदीक जा पहुंची |

"निम्मी ! क्यो रो रही हो ?"

“माँ वो जोगन मेरी बुआ है न ??
 
‘दीदी तो इसने सब सुन लिया’

“  ‎खैर पता तो चलना ही  था |”

“मै कब तक छिपाती जब यही  माँगती फिरती है |”

इस जोगन ने  हमें कही का  नही रखा |  इससे अच्छा तो यह होता कही मर जाती या कही और अपनी भक्ति के गाने कही दूसरी जगह  गाती  | हमारा जीना तो दूभर किया ही था अब इस मासूम की जिन्दगी पर भी असर डालेगी !!"

माँ निम्मी को चुप कराने लगी , "चुप हो जा निम्मी तू तो मेरी रानी बिटियां है न |"
"हाँ माँ " , कहकर निम्मी माँ के सीने से जा लगी |
निम्मी का दिल टूट गया था जिस जोगन की वह राह तकती थी माँ से छिप छिप देखती थी उससे उसे घृणा हो चली थी |
अपने माता-पिता के प्रति उसका प्रेम पहले से  ज्यादा बढ गया उसने ठान लिया कि वह अपनी बुआ के जैसे माँ बाप को  कभी दुख न देगी |
साथ ही निम्मी ने ठान लिया था कि वह जोगन को सबक जरूर सिखायेगी |


निम्मी ने जोगन की सच्चाई जानने के बाद उसकी तरफ से ध्यान पूरी तरह से हटा दिया |

एक दिन निम्मी ने देखा जोगन घर के बाहर खडी गीत गा रही है निम्मी को उसे देख क्रोध आया पहले की तरह प्यार नही |
आज अच्छा मौका है निम्मी जल्दी से बाहर जा पंहुची ,  "ऐ जोगन यहां क्या शोर मचा रही हो जाओ कही ओर जाकर मांगों |"

जोगन ने जब निम्मी को यह कहते सुना तो  उसका चेहरा निस्तेज पड गया | वह चुपचाप वहां से चली गयी |
निम्मी को लगा  , अच्छा  हुआ पिंड छुटा इससे |
कुछ समय बाद जोगन  फिर दरवाजे पर खडी गाने गा रही थी ,

"प्रभु संग प्रीत लगाई मैने
की है उनसे सगाई ......!!!"

निम्मी ने जब उसका गाना सुना तो उसे गुस्सा आया जबकि पहले वह खुश हो उसका गाना सुनती और पैसे दे देती थी , निम्मी गुस्से से  दनदनाती हुई बाहर जा पंहुची , "तुम्हे कहा था न ,  यहाँ नही आना फिर आ गयी तुम ? "
 "क्या हुआ "? निम्मी माँ भी पीछे पीछे आ पंहुची ..
निम्मी फट पडी, " प्रभु संग प्रीत लगाई...! तुम्हारे माता-पिता , भाई-भाभी से प्रीत नही हुई तुम्हे !
माँ बाप भी भगवान होते है , हूं बडी जोगन बनती है भगवान की की भक्तिन "!!
जोगन की आँखे फटी रह गयी आँखों से आंसु टपकने लगे
अपनी झोली थाम निराश कदमों से लडखडाती हुई चली गयी |
उसके बाद फिर उस जगह कभी जोगन का गीत सुनाई न पडा |

##

आगे की कहानी जोगन पार्ट -2सुनीता शर्मा खत्री
©

Pic from goggle
‎‎

आखिर क्यों ??

****************** " क्या माँगती हो भगवान से पूजा पाठ कर ! " पूजा गृह से वापस लौटी सन्जना पर तंज कसता हुआ नवीन मुँह टेढा कर मुस...

life's stories