Saturday, January 20, 2018

कमाई - 1

जैसे जैसे संगीत तेजी से बजता जा रहा था उसके पांवो की थिरकन भी तेजी बढती जा रही थी मानो पांवों में बिजलियां कौंध रही हो !
दिमाग में कुछ नही था बस था तो पैसों की जरूरत का ख्याल ! बस आज थोडी कमाई और हो जाये ताकि मिनी के लिए दूध का डब्बा और दवा का इन्तजाम हो सके , सुबह उसका कुम्लाया चेहरा देख दिल भर आया |
बार में हर शख्स उसको ही देखने लगा नशा शराब में था या उसके नृत्य में ,
वाह !! क्या नाचती है सारी लडकियों पर से नजर हटा सारे पियक्कड  उसी पर नजर गडा बैठे |
जब संगीत खत्म हुआ थिरकन थम बेहोशी के आलम में जा पंहुची , आँखे खुली सारी लडकिया उसके इर्द गिर्द बैठी थी , " क्या हुआ रवीना , आज तो तुम होश में नही थी "??
" जिसकी बेटी बीमार हो वह होश में कैसे हो सकता है"?  रवीना नाच से मिले रूपयें इकट्ठा किये जो लडकियों उसे दिये , तुम्हारी बेटी बीमार है तुम हमारे भी ले लो और उसका इलाज कराओं सभी एकसुर में बोलने लगी ...
"नही नही... इतने काफी मुझे पता तुम लोगो की हालत भी | तुम सबने मेेरा ध्यान रखा उन पियक्कडों से बचा के रखा यह क्या कम है |"
अब मै चलती मुझे मिनी को डा0 के पास ले जाना है |
जैसे बाहर निकली बार मालिक सामने ही खडा था  , " कहां चली सारी कमाई  लेकर इधर भी तो दे ," 
" कल भी ऐसे ही नाचना "
" कल नही आ पाऊगी , मेरी बेटी बहुत बीमार है |"
 " साली तेरे बहाने सब पता है जा रही होगी यार के साथ ऐश करने "
 और उसने उसके  सारे रूपये छीन , चन्द उसके हाथ में पकडा दिये , वह गिडगिडाती रही उसे रहम न आया |

बेबस रवीना चल पडी मजबूर कदमों से , आँख से आंसु लगातार बह रहे थे इतने कम पैसों में कोई ढंग का डाक्टर नही देखेगा , फिर उसी दवाखाने से दवाई लानी होगे जहां के इलाज से सिर्फ थोडे दिन को आराम आता है मिनी दुबारा बीमार हो जाती है , मन  ही मन में बार मालिक को कोसती रही जिसने उसकी मेहनत की कमाई को छीन लिया |


उसने फैसला किया कि कल से सडक पर नाचेगी चाहे कुछ भी हो पर अपनी कमाई का हिस्सा किसी को भी नही देगी |

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सुनीता शर्मा खत्री

आखिर क्यों ??

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