Tuesday, May 29, 2012

Ganga ke Kareeb: तीर्थ नगरी की विवशता................!

Ganga ke Kareeb: तीर्थ नगरी की विवशता................!: जैसे -जैसे गर्मी से पारा बढता जा रहा है वैसे वैसे तीर्थ नगरी की मुशकिलें भी  बढती जा रही है । भीषण गरमी के कारण बीमारियां तो अपने पाव पैसार ...

Saturday, May 12, 2012

मां.......................!






एक सुखद अहसास है मां का शब्द
गहरी पीडा में मुक्ति का बोध
थकान में आराम 
जन्नत है उसकी गोद
हर शब्द कम पड
जायेगा मै क्या लिखुं
मां का आंचल
उसका प्यार, उसकी नाजूक 
उंगलियों का स्पर्श 
बालों में फेरना,
उसके ऎसा करते ही गहरी
नींद, बस गहरी नीद बस सकुन................!

Friday, February 24, 2012

Ganga ke Kareeb: अस्थि विसर्जन कहां हो.........? (ऋषि केश बनाम हरिद...

Ganga ke Kareeb: अस्थि विसर्जन कहां हो.........? (ऋषि केश बनाम हरिद...: गत दिवस सूफी गायक कैलाश खेर की मां की अस्थियां ऋषिकेश में चिदानंद मुनि द्वारा गंगा में विसर्जित कराये जाने के कारण हरिद्वार के तीर्थ पूरोहि...

Thursday, December 29, 2011

पलायन जिन्दगी से .........?

सुबह अखबार में एक खबर ने दिलों दिमाग को हिला दिया एक लडकी ने सिर्फ इसलिए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली क्योकि बी.ए की परीक्षा में नम्बर कम आये क्या जीवन इतना सस्ता है ? क्या हो गया आज के युवा वर्ग इतनी छोटी छोटी बातों पर जान दे बैठते है उससे पहले 12 साल के लडके ने सिर्फ इसलिए खुदकुशी कर कर ली क्योंकि उससे एक मुबाइल गुम हो गया शायद अब हमें अपने बच्चों की परवरिश पर लापरवाह न हो कर इन्हें अपने भरोसे पर पालना होगा । आज सहनशक्ति के गुण मां बाप अपने बच्चों में विकसित नही कर पा रहे तभी वह   बिना किसी वजह अपनी जान ले लेते है छोड देते अपने पालने वालों के उपर तौहमते व जिल्लत क्योकि जिस घर में कोई आत्महत्या कर लेता है वह घर समाज में उचित स्थान नही रखता है ।
 जानना होगा उन वजहो को जिनकी वजह से आज के बच्चों में सहनशीलता व जीवन के प्रति जुझारूपन व संघर्ष की भावना पैदा नही हो रही वह पलायन कर है अपनी जिन्दगी से वह भी उस उम्र में जब  जीवन शुरू भी न हुआ हो........?    

Friday, December 9, 2011

जिन्दगी से कितना दूर भागोगे तुम...................!

जिन्दगी से कितना दूर भागोगे 
यह हर नया रूप धरती है 
तुम हो जाते हो अंचभित 
कभी कभी डरते हो
कभी डटते हो
कभी जिद करते हो
चाहोगे जिस दिन जीना 
मौत तुम्हे डरायेगी,रूलायेगी
जिसे दिन चाहोगे तुम 
कहना इसे अब अलविदा
जिन्दगी तुम्हे ललचायेगी
जीने पर कर देगी विवश
न चाहते हुए भी.................।
तोड देगी तुम्हारे हर
उस भ्रम को जो देता 
रहा तुम्हे जिन्दगी 
कब तक झूठ के सहारे 
जीने का बहाना करते रहे तुम!
वो फरेब के सहारे
रचता रहा हर रोज
कहानियां सिर्फ ,जिन्दगी 
जब आईना दिखायेगी
कैसे खुद से नजरे 
मिलायेगी जिन्दगी.....................!

Monday, December 5, 2011

जो नही है साथ...................!

जो नही है साथ ,भारतीय सिनेमा का सदाबहार अभिनेता देवआन्नद जिन्होने बरसों तक आम जनमानस के दिलों पर राज किया । उनकी मृत्यु से सभी को धक्का सा लगा है बालीवुड उदास है पर आम लोगो में भी एक उदासी घिर आयी है । यह जीवन है जो आया है  जायेगा भी बस पहचाना जायेगा तो अपने कर्मो से कोई किसी तरह अपनी क्षमता योग्यता से समाज में अपनी छवि तो बनाता ही है बस उसी के आधार पर जीवनधारा बहती है साथ ही इस जीवनधारा में शामिल होते है लोग हमारे सुख दुख में यही जीवन है। इसी तरह जीवन जीते है देव आन्नद अपनी फिल्मों में किये गये अभिनय के लिए अपनी बनायी फिल्मों के जरिये आज भी हमारें साथ यह कह कि वह नही है हमारे बीच तो उनका अनादर ही होगा क्योकि अपनी कर्मो के लिए जब हम किसी को याद करते है वह उसे अमरता की ओर ले जाते है वह तो कर्मयोगी ही थें अपनी अदाओ से  अभिनय से और सबसे अलग अन्दाज से जनमानस के दिलों में गहरी जगह बनायी थी ।
                एक उदासी सी है वातावरण में यह कब तक जायेगी नही पता  ........................ 

Thursday, November 17, 2011

बेरहम है जिन्दगी.....!

बेरहम है जिन्दगी तू 
हरदम नया रंग दिखाती है 
तोड देती है है सपनों को
फिर नया ख्वाब दिखाती है।
बेदहम है जिन्दगी तू
मौत का समान बेचती है 
आज कहू तूझे जिन्दगी


पल में मौत बन खडी हो जाती है
कही दूर कोई किल्कारी सूनाई
पडती कानों में लगता अभी नही 


विराम फिर राह पर चल पडती जिन्दगी
वक्त काटना भी मानों हो एक सजा
पर वक्त को भी कभी कभी 
झुका देती है जिन्दगी ।

Monday, October 24, 2011

HAPPY DEEPAWALI

धनतेरस एवं दीवाली हार्दिक शुभकामनाएं........

Wednesday, October 12, 2011

करवाचौथ व्रत, संजीवनी वैवाहिक रिश्तें की

हमारे देश में कितने त्यौहार है गिनती नही की जा सकती शायद हर मौसम के हर रिश्तें के अलग अलग त्यौहार है सचमुच रिश्तों को भी त्यौहारों में लपेट कर संस्कारों से बांध हर रिश्तें को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है धार्मिक दृष्टि कोण को न देख कर यदि हिन्दुओ में वैवाहिक रिश्तें को अटूट बनाता हुआ आ रहा है करवाचौथ का त्यौहार। मीडिया की दखअंदाजी ने इसे नये आयाम दे दिये है ।
करवाचौथ का त्यौहार वास्तव में पति पत्नी के रिश्तें को संजीवनी प्रदान करता है जो रिशता जिम्मेदारियों के बोझ तले उन्हे खुद के बारे में सोचने का समय तो देता व देता उन पुरानी यादों को उम्र के साथ धुंधली पडती जाती है । सुहागने दिन भर निर्जल व्रत रख इस अपने सुहाग के लिए लम्बी उम्र की दुआए मागती है जिनका विवाह नही हुआ वह अपने लिए वर की कामना रखती है ।
यहां मेरा मकसद इस त्यौहार व व्रत का बखान करना या उसके धार्मिक व समाजिकता का वर्णन करना नही है क्योकि यह सभी जानते है व परम्पराओ का पालन भी करते है किन्तु जिस तरह विवाह संस्था में आज के समय में बदलाव आये है वहां इस तरह के धार्मिक आयोजनों महत्व और भी बढ जाता है व रिश्तों में पहले से अधिक प्रगाढता आ जाती है क्या अन्य संबधो जैसे लिवइनरिलेशन मे इस तरह के संस्कार संभव  है जिसे आज की महानगरीय पीढी ने अपनाया । क्या हमारे ,धार्मिक संस्कार जो विवाह जैसी संस्था में संभव है आज पहले से भी अधिक प्रांसगिक नही ?

Sunita Sharma  Khatri : कितनी ही कहानियां हमारे जीवन के चँहु ओर बिखरी रहती हैं कुछ भुला दी जाती है कुछ लिखी जाती हैं. हर दिन सवेरा होता है, ...

life's stories