जिन्दगी के उतार चढाव में झांकने की एक कोशिश का नाम है जीवन धारा। बह रहे है इस धार में या मंझधार में कौन जाने?
Wednesday, September 8, 2010
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Sunita Sharma Khatri : कितनी ही कहानियां हमारे जीवन के चँहु ओर बिखरी रहती हैं कुछ भुला दी जाती है कुछ लिखी जाती हैं. हर दिन सवेरा होता है, ...
life's stories
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.....last part of tum mere ho ... मै अपने घर वापस आ चुकी थी तुम्हे छोड़ कर तुम्हारे खुबसुरत शहर को छोड कर क्यूंकि अब तुम्हे जो आना था प...
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तुम्हारे लिए **************** 'गुडिया की मम्मी, जल्दी आओ... सारी की सारी चली गयी एक तुम्ही हो जो हमेशा देर करती हो '...जाने दो ...
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................ मन करता है आँखों में एक संसार बसा ले हाथो में हाथ ले ,पतझड़ के मौसम में इन संकरी रहो में हम साथ साथ गुजर जाये . मुझ ...
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...........तुम जो लगभग गिरने ही वाले थे तुम्हारी बाजु को कस कर पकड लिया ..... तुम हँसने लगे इसी तरह पकडे रहोगी तो मै हजार बार गिरने क...
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. .....विवेक के जाने के बाद मै भी ऑफिस के लिए निकल पड़ी ..धुप लुकाछिपी का खेल खेल रही थी फिर से बारिश होने लगी ...घर से ऑफिस बहुत दूर था . ख...
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