Wednesday, January 12, 2011

मुबारक हो सभी को लहोडी का त्यौहार



मूँगफली की खुशबू ,गुड की मिठास,मक्के की बहार
ख़ुशियाँ मिले हजार,मुबारक हो सभी को लहोडी का त्यौहार।

Monday, December 13, 2010

भड़ास blog: आखिर कब तक सहूंगी......

आखिर कब तक सहूंगी....... यह आलेख सीरीज की नवीनतम कडी को पढने के लिए क्लिक करे शीर्षक पर

Saturday, December 11, 2010

Ganga ke Kareeb: गंगा के करीब ........ आध्यात्मिकता की तलाश

"कहते है तीर्थो के पवित्र वातावरण में ऋषि-मुनियों के सत्संग से मनुष्य निष्पाप हो जाता है। अर्थवेद के
अनुसार बडे-बडे यज्ञो का अनुष्ठा..."


पूरी पोस्ट के लिए शीर्षक पर क्लिक करे..............।

Wednesday, December 8, 2010

Ganga ke Kareeb: प्रश्न बहुत है ?

"बनारस में गंगा आरती के दौरान आतकियों ने बम विस्फोट कर बहुत ही घृटित कार्य किया है उन्हे तो आतंक फैलाना ही है क्या इस तरह के हमारे धार्मिक स्..."

Sunday, November 7, 2010

जीवन पानी सरिता का.......

जीवन चलता कभी न रुकता
रूकता तो मंझधार है
जीवन पानी  सरिता का
बहना जिसके ध्येय है ,
अन्तहीन सफर ,कभी अन्धेरे
कभी गतिहीनता है, यह सफर
बडा अनोखा यहां हार जीत का सवाल है
चलते चलते सोचे जरा
यह कौन सा पडाव है
रूक जाये, जब समय भी
टिक- टिक क्या कहती घडी
अपने परायो के फेरों में उलझे रहते है हम।
जो दे जख्मों को उनसे खुशियों
की तमन्ना कैसे हो ।
जीवन फिर भी चलता
गम चाहे , खुशी हो
यह सफर तो कटना है
जीवन चलता कभी न रूकता
रूकता तो मझधार है..................

Tuesday, September 21, 2010

Ganga ke Kareeb: क्रोधित है मां.........................!


"उफान में गंगागंगा के किनारे बस्तियां हई जलमग्न गंगा के प्रवाह में बह गयी शिव गंगा ,के करीब रहने वाले
सकते में है आश्चर्य में है उ..."
थम गयी जिन्दगी की रफ्तार,फिर चल पडी अपनी राह जिन्दगी ............................!


पूरी पोस्ट पढने के लिए क्लिक करे  क्रोधित है
मां..........
http://sunitakhatri.blogspot.com

Wednesday, September 1, 2010

कौन है यह..........नागा सन्यासी....?

Ganga ke Kareeb: कौन है यह..........नागा सन्यासी....?: "कौन है यह..........? जो शरीर पर भस्म लगाये ,वस्त्र- हीन,अदृभुत रूप वाले, अवधुति........? जन साधारण के मन में नागा सन्यासियों को लेकर कौतुह..."
यह आलेख सीरीज में है कृपया पढने के लिए शीर्षक पर क्लिक करे............

Friday, August 20, 2010

प्रकृति से हारी जिन्दगी ........

बुधवार को बागेशवर के कपकोट के सुमगढ में सरस्वती शिशु मंदिर में बादल फटने के कारण स्कूल के मलबे मे 18 मासूमों की जाने चली गयी टी.वी चैनलों में आ रही खबरे, दिल दहलता है इस तरह की खबरों से जब प्रकुति का कहर बरपता है तो कुछ नही बचता ।जिन्दगी उन लोगो की क्या होती है? जो इस तरह की घटनाओं का शिकार होते है वह परिवार वह माताये जिन्होने अपने नन्हे बच्चो को स्कूल भेजा पढने के लिए उन्हे क्या पता वहां मौत उनका इन्तजार कर रही है स्कलो की इमारतें इतनी कमजोर होती है कि जरा सी प्राकृति विपदा को सहन न कर सकी जबकि पहाडों मे तो बादल फटना कोई नयी बात नही ।
जीवन तो फिर भी आगे चलेगा पर उन परिवारों में कितनी दहशत होगी जिनके मासूम इसमे दफन हुए क्या वह इस सदमें से उबर पायगे ।बुधवार को बारिश थी ही बहुत भयानक सुबह जब बच्चो को स्कूल भेजने के उठाया तो चारों तरफ अंधेरा था इतना कालापन न जाने क्यो लग रहा था आज न जाने क्या होने वाला है ।प्रकृति के आगे आज भी मनुष्य बेबस है ,जीवनधारा चलते चलते ठहर जाती है ।
उत्तराखण्ड में बारिश अभी जारी ही है मेरी तीर्थ भूमि ऋषिकेश में जरूर आज बारिश से राहत मिली व बादलो के बीच से सूर्यदेव के दर्शन होते रहे। स्कूलो मे अवकाश घोषित होने से स्कल बन्द है पर दिल के किसी कोने में यह डर भी है अपने जिगर के टूकडों हम स्कूल तो भेज देते है पर क्या वह वहां पूरी तरह सुरक्षित है बस यही सब सोचते हुए जिन्दगी दूसरे कामों में उलझ जाती है क्यों यह जीवन है.............
.....।

Sunita Sharma  Khatri : कितनी ही कहानियां हमारे जीवन के चँहु ओर बिखरी रहती हैं कुछ भुला दी जाती है कुछ लिखी जाती हैं. हर दिन सवेरा होता है, ...

life's stories