Thursday, September 7, 2017

वापसी

वापसी



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..."मुझे छोड दो नही जाना है तुम्हारे साथ", "| चलों ..तुम्हारा समय पूरा हो चुका है |" "मै नही जाओगी मेरे छोटे छोटे बच्चे है उनकी देखभाल कौन करेगा ?" तुम्हे चलना ही होगा .., यमदूत उसे घसीटते हुए ले गए |
महाराज..." यह औरत बहुत शोर कर रही थी बहुत कठिनाई हुई इसे लाने में "  | "हू़. ..तो तुम हो ! तुम्हे कौन नही जानता पूरे देवलोक में तुम्हारी माता की  अटूट भक्ति की कहानी सभी जानते है आदिशक्ति की पुजारिन को सभी प्रणाम करत है  ,  तुम्हे नमन है , हे देवी भक्तिन तुम यमलोक क्यो नही आना चाहती तुम्हे तो पता है तुम्हारा  पृथ्वी पर निवास की अवधि समाप्त हो चुकी है |"
.."मुझे पता है मृत्यु के देवता पर मेरे छोटे बच्चे ,उन्हे मातृत्व विहीन न करो | अभी वह खुद को संभाल नही सकते | उन्होने अभी कुछ नही देखा | वो अबोध मेरे बिना क्या कर पायेंगे |" , " इसकी चिन्ता तुम न करो सभी प्रणियों का जीवन निर्धारण परमात्मा की इच्छा से होता है | हमे पता है तुम्हारे बारे में  पर हम विधि के विधान के आगे मजबूर है |" "नही मृत्यु के देव ! मेरे बच्चे अकेले है छोटे  है ,उन्हे बडा कर दूं फिर ले आना , मै खुश होकर आऊगी मै खुद भी धरती पर ज्यादा नही रहना चाहती |  पर थोडा समय दे दो |यमराज माँ की करूणता से द्रवित हो उठे |
वह दुख से भर गये | पहली बार उन्हे भी लगा इस स्त्री को अभी यहां नही आना चाहिए | उन्होने पृथ्वीलोक की ओर देखा , उस औरत की छोटी बच्ची अपनी माँ के बगल में बैठी खेल रही है अपनी गुडिया , खिलौने फैला कर | माँ का शरीर निष्चेष्ट पडा है उसे पता भी नही उसकी माँ की मृत्यु हो चुकी है  | उसका पुत्र घर के बाहर अपने मित्रों के साथ खेल रहा है | पति काम  करने  के लिए शहर से बाहर गया है | अभी सबकुछ समान्य था | यमराज उन मासूम बच्चों को देख रो पडे , इस औरत को अभी और जीना होगा वह सही कह रही है |... चल पडे महाकाल से मिलने वहां पहुचें तो देखा , माँ अादि शक्ति महाकाल के आगे हाथ जोड कर खडी उनसे विनती कर रही है .."हे महाकाल आप तो कालों के भी काल है !
"उस बेचारी को थोडा जीवनदान दे दो वह मेरी भक्त  है आप भी जानत है वह सरल ,सीधी ,छल कपट से दुर ममतामयी स्त्री है उसके जीवन में उसके बच्चों के सिवाय कोई खुशी नही उसने कभी किसी बुरा नही किया कभी किसी पीडा नही दी ,  हे कालेश्वर ! दया करो |"
माता शक्ति की अनुय विनय व यमराज की प्रार्थना सुन महाकाल ने उसे जीवन दान दे दिया |  यमदूत उसे वापस धरती पर  छोड अाये |
यमराज ने देखा उस औरत के मंदिर का दीया अभी भी जल रहा था वह नमन कर वापस यमलोक चले गये |
छोटी बच्ची को भुख लगी तो खिलौने पटक कर  वह माँ को जगाने लगी तब तक पुत्र भी खेलकर वापस आ गया माँ खाना दे दो बहुत भुख लगी है बच्चों की आवाजे सुनकर वह जाग गयी ...|
सर पकड कर बैठ गयी इतनी पीडा क्यों हो रही है |
महाकाल व महाकाली ऊपर से मुस्कुरा रहे थे |

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लेखिका
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सुनीता शर्मा खत्री

आखिर क्यों ??

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