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पश्चाताप की ज्वाला

पश्चाताप की ज्वाला 
**************** ( कहानी , भाग-1)

‘ रीया रीया’ ...माँ ने पूरा घर छान लिया,  छोटी बेटी का कही अता-पता नही , कहाँ गयी है किसी को कुछ पता नही  माँ बडी बेटी के कमरे में आती है जो बच्चों को खाना खिला रही थी ..."जीया तुमने रीया को देखा कही गयी है  ? नही  क्या? तुम्हे बता के नही गयी  , नही माँ मुझे नही पता मै तो बच्चों के कामों में व्यस्त थी | आ जायेगी अपनी किसी सहेली के घर गयी होगी | तभी नन्नू भागा भागा गया बैठक से एक पत्र लेकर आया माँ को थमा दिया , "यह क्या है ? किसका खत है ," "मौसी ने दिया था सुबह और कहा था जब सब मेरे बारे में पूछेगे तब देना ".."अरी जल्द पढ जीया "...माँ के होश उड रहे थे , "क्या लिखा है इसमें !!" जीया ने खत पढा और वही पडे सोफे पर निढाल हो गिर पडी | "क्या हुआ तू बताती क्यो नही माँ चीख रही थी माँ को ऐसे देख जीया ने बताया कि रीया ने दीपक से शादी कर ली है और वह उसके साथ उसके घर जा रही है तुम कभी उसकी शादी दीपक से नही करते इसलिए दोनों ने चुचचाप कोर्ट मैरिज कर ली है अगर वह उसको खुश देखना चाहते है तो कोई बवाल न करना…

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