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तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए

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'गुडिया की मम्मी, जल्दी आओ... सारी की सारी चली  गयी एक तुम्ही हो जो हमेशा देर करती हो '...जाने दो उनके पास मेरे जितना काम नही है |
बैठी रहो यही , मै तो चली !
सजधज के मोहल्ले की औरते करवाचौथ की पूजा , कथा के लिए मुखियाइन के घर जाती है | पतियों की आमदनी इतनी नही है पर न जाने करवाचौथ के लिए नये गहने कपडे कहां से ले आती है | गुडिया की माँ तैयार होते होते सोच रही थी कितने साल यूं ही बीत गये इस बरस भी एक साडी नही ले पायी अपने लिए , सारी आयेगी , बन ठन के उसके जी को जलायेगी |
क्या पहनु , कुछ समझ नही आ रहा ...घर का काम करते करते  पूरा दिन निकल गया , चूडी ,बिंदी, कंगन सब है पर साडी पुरानी  | सब की जरूरते पूरी करते करते अपने लिए कटौती करना उसकी आदत थी |
मै चुप था गुडिया माँ ,  मेरी पत्नी उसे मै देख रहा था , गुडिया हँस रही थी , तभी आवाज आयी , गुडिया मम्मी है... हां जरा बुला दो तो | माँ आँटी आयी है , कौन ..आकर देखो न ! जी कहिए मैने पहचाना नही यह लीजिए , आपके कपडे सब तैयार कर दिया है | मेरे कपडे पर मैने कब ?? लिए ??.. यह भाई साहब दे गये थे , ब्लाऊज ,साडी सब तै…

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