तुम मेरे हों .......३

...........तुम जो लगभग गिरने ही वाले थे तुम्हारी बाजु को कस  कर  पकड लिया .....


तुम हँसने लगे इसी तरह पकडे रहोगी तो मै हजार बार गिरने को तैयार हू ....डर गयी थी मै कहा पकड़ पाई में तुम्हे तुम तो चले ही गए न में तो अकेले ही रह गयी न .....तनहा.
तुम्हारे साथ बिताया वक्त जीने के लिए काफी है .....शाम गहराती जा रही थी . वापस जाना होगा आज पूरा दिन तुम्हारी यादो में बीत गया पता ही नहीं चला ....अँधेरा होने से पहले घाटी में लोंटना होगा ..
कितना फर्क है इन रास्तो में पहले हम साथ साथ चलते थे अब मेरा जिस्म है पर मन में, वहा  तुम्हारा राज है ..सोचा न था इन दिलचुराते रास्तो पर अकेले ही चलना होगा ...आँखों के पोर गीले हों चले थे .
तुम्हारे साथ बिताये कुछ कुछ पल अब बरस बन मेरे साथ है .तुम गए दर्द छोड़ गए यही मेरी जिंदगी है .आंसू मेरी जिंदगी का हिस्सा है इन्हे खुद से अलग नहीं कर सकती न ही इस शहर से अलग हों सकती क्यूंकि यहाँ तुम्हारी यादे है यहाँ की पहाडियों में, दरख्तों में,फिजाओं में तुम्हारी खुशबू है वो बाते है जिनकी टोह लेने में निकल पड़ती हू दीवानों के तरह ..पीर बाबा की माजर पर मेने बस एक दुआ मांगी थी ..पर मेरी आरजू पूरी नहीं हों सकती थी क्या मांग लिया था की भगवान ने चाहा ही नहीं .
...........आसमा में सितारो की झीलमिलाहट थी तो नीचे घाटी रोशनी से झिलमिला रही थी .  


वापस घर पहुंची तो रात हो चुकी थी आज  मुझे कुछ होश नहीं था पूरा दिन यू ही बीत गया . .................................बिस्तर पर जाते  ही नींद आ गयी देवानी जाने क्या कह रही थी पता नहीं आँखों में तुम्हारा अक्स लिए कब आंख लग गयी .......
....to be continue.

(all pictures frm google)

                                          

Comments

  1. बहुत खूब ह्रदय को उतर दिया इस कबिता में------!

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