तुम मेरे हों ....part 5

.....part 5

मम्मी पापा वापस चले गए ....मै फिर अपनी तन्हाईयो में  तुम्हारी यादो के साथ थी, याद आने लगा वह समय जो हमने साथ बिताया था कितना खुश थे हम दोनों परिंदों की तरह उड़ते फिरते थे ......कितना खुबसूरत था वो 
चाँद जो तुमने दिखाया था ...कभी न भूलने वाली वो शाम जो हम एक साथ बिताते थे .जब अचानक एक टूटता हुआ तारा दिखायी दिया यह क्या था मैने   कहा इतना भी नहीं जानती यह टूटता हुआ तारा था कहते है जब कोई तारा टूटता है तो कुछ मांगना चाहिए काश में यह जानती .तुमने क्या माँगा क्या मांग लो अब तुम्हारे सिवा तुम हों तो मेरे पास .मुझे तुम पर नाज था 
तो फिर घर चलते है मम्मी पापा से बात करो ,करूँगा पहले अपनी पढाई  तो पूरी कर लो जिसके लिए तुम यहाँ आई  हों...मन नहीं करता 
तुम्हारा चेहरा नजर आता है किताबो में ...फेल हों जाओगी तो मुझे ही कोसोगी की मेरी वजह से पढ़ी नहीं, ठीक है मुझे हॉस्टल छोड़ दो... फिर .उसकी बाईक हवा से बाते करनी लगी ....धीरे चलाओ  न ...तेज चलाता हूँ कम से कम तुम झटके लगने पर मुझे पकड़ोगी तो वर्ना तुम तो ऐसे करती हों जैसे मुझे पकड़ने पर तुम्हे करेंट लगता हो... हाँ लगता हाँ, मै बुदबुदाई ......शब्द हवाओ से जा मिले ...........! 

मेरी परीक्षा का आखिरी दिन था सभी पेपर बहुत अच्छे हुए थे में बहुत खुश थी तुम मुझे लेने के लिए कालेज के गेट के बाहर खड़े थे मेरे इंजार में अपने सारे काम छोड़ कर मुझसे मिलने आये थे गेट से बहार निकलते ही तुम नजर आये अपनी हरी लाल चेक की कमीज़ में जो तुम्हारे गुलाबी चेहरे पर खिल रही थी ......अपनी बाईक पर बैठे हुए .....हाय राकस्टार ....लडकियों को लाइन मारने के लिए इतना सज धज कर आये हों..... हाँ  तुम्हारी वजह से तो बात कर ही लेगी वर्ना हम से कौन बात करता है . अच्छा ये हवाई घोडा आज कहा जा रहा है कहाँ चलोगी बोलो ....जहा तुम ले चलो .
उस दिन हम दोनों घूमते रहें ......बादल छाए हुए थे ......फिर अचानक जोरो से बारिश होने लगी .उसने बाइक एक बड़े घने पेड़ के नीचे खड़ी कर दी ......हम दोनों लगभग भीग चुके थे थोड़ी देर रुक जाते है वर्ना तुम बीमार पड़ जाओगी .

बारिश ने हमें दरख्त के नीचे खड़े रहने पर मजबूर कर दिया.ठंड  भी थी और तुम्हारे कंधे की गरमाहट भी ......कल मुझे वापस जाना था इस शहर में मेरा यह आखिरी दिन था ......बारिश गवाह थी उसके वादे की  कि वो जल्द ही मेरे घर आयेगा मुझे हमेशा के लिए अपना बनाने के लिए ..........!.. to be continue..... 
(all pictures from Google)

Comments

  1. हालाँकि मैंने छायावाद B.A.मे पढ़ा था परन्तु मन्नू भंडारीजी से पारिवारिक लगाव के चलते छायावादी साहित्य के प्रति रूचि अधिक होना लाजिमी हैं...मुझे ईसमें छायावाद की झलक दिखती हैं.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular Posts